12 बातें साबित करती हैं कि क्रिकेट के मैदान में ही नहीं, असल जिंदगी में भी जेंटलमैन हैं द्रविड़

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नई दिल्ली | अगर क्रिकेट जेंटलमैन गेम है तो इस बात में किसी को शक नहीं होगा कि भारत के पूर्व कप्तान और अपने समय के दिग्गज क्रिकेटर राहुल द्रविड़ इस खेल के सच्चे जेंटलमैन हैं। इस दुनिया में ऐसे लोगों की कमीं नहीं है जो शोहरत और दौलत कमाने के बाद भी अपनी जड़ों को नहीं भूलते और पैर जमीन पर रखने में विश्वास करते हैं। राहुल द्रविड़ की शख्सियत भी कुछ ऐसी ही है। आप भी पढ़िए आखिर क्यों राहुल द्रविड़ एक बेहतरीन क्रिकेटर के साथ ही एक बेहतरीन इंसान भी हैं…

1. वंचित बच्चों को शिक्षा देने वाले एक एनजीओ ने राहुल द्रविड़ के साथ एक करार किया था। इस करार के तहत द्रविड़ के हस्ताक्षर वाला बल्ला इन बच्चों को दिया जाना था। लेकिन, राहुल द्रविड़ ने इन बच्चों को अपने हस्ताक्षर वाला बल्ला तो भेंट कया ही साथ ही उनसे मिलने के लिए समय भी निकाला। इसके लिए द्रविड़ से एनजीओ ने कोई अनुरोध नहीं किया था बल्कि यह उनका खुद का निर्णय था। उन्होंने इन बच्चों के साथ वक्त गुजारा और अपने संबोधन में कहा, ‘क्रिकेट को एन्जॉय करने के लिए खेलिए। जब आप स्कूल में रहें तो पढ़ाई में मन लगाएं और खेल के मैदान में रहें तो गेम में मन लगाएं।’
2. राहुल द्रविड़ जितने सख्त और गंभीर दिखते हैं दरअसल, उतने हैं नहीं। वह टांग खिचने का मौका नहीं चूकते लेकिन, इस बात का ध्यान जरूर रखते हैं कि उनके किसी कमेंट से कोई दूसरा हर्ट न हो जाए। ऐसा ही एक मौका आया जब क्रिकेट कमेंटेटर संजय मांजरेकर और राहुल द्रविड़ कोलकाता में एक कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे। संजय मांजरेकर से बातचीत के दौरान राहुल द्रविड़ ने हल्के फुल्के अंदाज में सौरव गांगुली की किसी बात को लेकर टांग खिचीं। कोलकाता और सौरव गांगुली का गृहनगर है और वहां दादा को लेकर लोगों के बीच दिवानगी है, इसको भांपते हुए राहुल ने तुरंत कोलकाता वासियों से माफी मांगते हुए कहा, ‘मैं कोलकाता के लोगों को नाराज नहीं करना चाहता, ये मजाक था।’
3. राहुल द्रविड़ को बेंगलुरु में एक मैच प्रीव्यू में हिस्सा लेना था। वो वहां कुछ देर से पहुंचे। जब उनसे लेट हो जाने के पीछे कारण पूछा गया तो उनका जवाब था, ‘दरअसल, मेरे बच्चे की वजह से मुझे देर हो गयी। मुझे उनको स्कूल से पिक करना अच्छा लगता है। मैं जब भी शहर में होता हूं मुझे उनको स्कूल छोड़ना और वापस पिक करने जाना अच्छा लगता है। इसे मैं मिस नहीं कर सकता था।’
4. राहुल द्रविड़ भारत के लिए ओलंपिक और पैरालंपिक खेलने के इच्छुक खिलाड़ियों की अपने मेंटरशिप प्रोग्राम ‘राहुल द्रविड़ एथलीट मेंटरशिप प्रोग्राम’ के जरिए सहायता करते हैं। पैरा स्विमर शरत गायकवाड़ एक बार इतने निराश हो गए थे कि वह तैराकी को हमेशा के लिए अलविदा कहने वाले थे। राहुल द्रविड़ ने शरत को भारत के लिए खेलते हुए अपने जीवन में आए कठिन और बुरे दौर के बारे में बताया और उनको रित किया। राहुल द्रविड़ मार्गदर्शन के बाद शरत गायकवाड़ ने 2014 के एशियन गेम्स में तैराकी प्रतिस्पर्धा में एक सिल्वर और पांच ब्रॉन्ज मेडल सहिल कुछ 6 पदक अपने नाम किया।
5. राहुल द्रविड़ का एक प्रशंसक जो कैंसर से पीड़ित था उनसे मिलना चाहता था। राहुल द्रविड़ ने उसकी यह इच्छा पूरी की। द्रविड़ ने स्काइप के जरिये अस्पताल में भर्ती अपने प्रशंसक से वीडियो चैट किया और उससे मिलने के लिए अस्पताल में व्यक्तिगत रूप से न पहुंच पाने के लिए माफी भी मांगी।
6. राहुल द्रविड़ अपने के दिनों में जिस क्लब के लिए खेलते थे उस क्लब को लोअर डिविजन लेवल की प्रतियोगिता में बाहर होने से बचने के लिए अपना मैच जीतना बहुत ही जरूरी था। राहुल द्रविड़ मौके पर मौजूद थे। क्लब के हेड कोच ने उनसे अपनी टीम की ओर से खेलने के लिए दरख्वास्त की और वो मान गए। राहुल ने उस मैच में शतक जड़ा और उनकी टीम मैच जीत गई। ये घटना राहुल द्रविड़ के क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद की है। उस मैच का आयोजन बेंगलुरु के एचएएल स्पोर्ट्स क्लब मैदान में हुआ था।
7. राहुल द्रविड़ से जब भारतीय टीम का कोच बनने के लिए बीसीसीआई ने संपर्क किया तो उन्होंने कुछ पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से बोर्ड का प्रस्ताव विनम्रता से ठुकरा दिया। लेकिन, बीसीसीआई ने जब भारत की नेशनल ‘ए’ टीम और अंडर 19 टीम को कोचिंग देने के लिए राहुल द्रविड़ की सेवा चाही तो उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। उन्होंने भारतीय क्रिकेट के भविष्य को संवारने के लिए अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पीछे रख दिया।
8. राहुल द्रविड़ की पत्नी विजेता द्रविड़ ने उनके बारे में पूछे जाने पर एक बार कहा था, ‘राहुल कहते हैं कि किसी चीज के बारे में शिकायत करने से अच्छा है उसमें सुधार किया जाए। यदि सामने वाले में सुधार की गुंजाइश नहीं है तो खुद के अंदर ही सुधार करना ज्यादा अच्दा होता है जिससे किसी से शिकायत की कोई गुंजाइश ही न रहे। वो कहते हैं कि खुद को इंप्रूव करने का कोई अंत नहीं होता, जब तक इंसान की जिंदगी रहती है सुधार की गुंजाइश भी रहती है।’
9. इंग्लैंड के शानदार और विवादों में रहने वाले बल्लेबाज केविन पीटरसन जब स्पिनर्स के खिलाफ संघर्ष कर रहे थे, तो राहुल द्रविड़ ने उनको एक लेटर लिखा था। उस लेटर में राहुल ने केविन को स्पिनर्स को कैसे खेला जाए इस बारे में बताया था। गौरतलब है कि राहुल द्रविड़ को दुनिया के कुछ उन चुनिंदा बल्लेबाजों में शुमार किया जाता है, जिनके क्रिकेट खेलने के तरीके में कोई गलती नहीं थी और वो क्रिकेट की किताब में सुझाए गए निर्देशों के मुताबिक ही बैटिंग करते थे।
10. जब दुनियाभर में लोग आइस बकेट चैलेंज में व्यस्त थे राहुल द्रविड़ ‘ब्लड डोनेटिंग चैलेंज’ में व्यस्त थे। राहुल द्रविड़ उस समय बेंगलुरु के अस्पताल में लोगों की मदद के लिए ब्लड डोनेट कर रहे थे। राहुल द्रविड़ एक ऐसी शख्सियत का नाम है जो पैसे, फेम और पद के लिए मीडिया का अटेंशन नहीं चाहता।
11. राहुल द्रविड़ को अक्सर बेंगलुरु में पब्लिक ट्रांस्पोर्ट का उपयोग करते हुए देखा जा सकता है। वो बहुत ही साधारण जिंदगी जीने वाले शख्स हैं। राहुल को कई बार आॅटो रिक्शा और मेट्रो से यात्रा करते हुए देखा गया है।
12. भारत और इंग्लैंड के बीच टेस्ट मैच के दौरान एक क्रिकेट प्रशंसक ने राहुल द्रविड़ के लिए लिखा, “सचिन इज गॉड, सौरव गांगुली इज नेक्सट टू गॉड आॅन आॅफ साइड, वीवीएस लक्ष्मण इज गॉड आॅफ फोर्थ इनिंग्स, बट ह्वेन द डूर्स आॅफ ए टेंपल आॅर क्लोज्ड, इवेन द गॉड इज बिहाइंड ‘द वॉल’ “

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