प्रवासी पक्षियों से बर्ड फ्लू का खतरा, पशुपालन विभाग की नजर

0
863

परिक्रमा रिपोर्टर
जोधपुर। सर्दियों के मौसम में प्रदेष में दुनियाभर में आने वाले प्रवासी पक्षियों पर इस बार बर्ड फ्लू का खतरा मंडराने लगा है, हालांकि अभी तक केवल भरतपुर में इस बीमारी के संकेत मिले है। राजस्थान पशु पालन विभाग और वन विभाग की 452 टीमें इन पर नजर रखे हुए है, इनके मलमूत्र के सेंपल जालंधर और भोपाल भेजे गए है।
फलौदी व खींचन के साईबेरियन पक्षियों के मलमूत्र सेंपल भी लेकर भेजे गए है। जोधपुर के गुड़ा विश्नोईयान मंडोर के सुरपुरा आदि क्षेत्रों में भी प्रवास पर है। राज्य के भरतपुर, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर में विदेशी पक्षी वर्तमान सीजन में ही आते है। जोधपुर में फलौदी व खीचन में सैकड़ों प्रवासी पक्षी वर्तमान में डेरा डाले हुए है। ये यहां प्रजनन भी करेंगे। ये यहां फरवरी के अंत तक टिके रहेंगे। वर्तमान में यूपी बोर्डर पर स्थित भरतपुर से दिल्ली से ही बर्ड फ्लू प्रवेश कर गया है। दिल्ली व यूपी में इसका वर्तमान में जबरदस्त कहर है। इस कारण राजस्थान में भी हाईअलर्ट किया गया है। यहां पक्षियों पर टीमें नजर रखे हुए है। राज्य के पोलट्री फार्म पर भी नजर रखी जा रही है।
लम्बी सर्दी के संकेतं
विशेषज्ञों की माने तो आमतौर पर नवम्बर माह में अपनी भारत उड़ाने भरने वाले प्रवासी पक्षियों की उड़ान इस बार दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में शुरू हुई है, इस कारण इस बार सर्दी लम्बी चलेगी, ये पक्षी कम से कम तीन माह तक यहां टिके रहते है, इस कारण इस बार सर्दी मार्च तक पडऩे की संभावनाऐं व्यक्त की जा रही है। जोधपुर के खीचन, फलौदी, गुड़ा, सुरपुरा, सरदार समंद आदि तालाबों में उत्तर एशिया, मंगोलिया, चीन, साइबेरिया सहित कई देशों से यहां आते है। इन्हें राजस्थान कुरेजा के नाम से भी पुकारा जाता है। एक जानकारी के मुताबिक खीचन में 500 कुरेजा पहुंच चुकी है, और अभी इनके झुंड प्रवास पर आते जा रहे है।
अधिकृत मत
प्रवासी पक्षियों का संरक्षण करने का कार्यवन विभाग करेगा, इसके लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है, इन पक्षियों के रक्त के नमूने लिए गए है
अनूप के. आर., डीएनपी प्रभारी, वन विभाग

LEAVE A REPLY