बेवॉच : खूबसूरत लड़कियों, ड्रग्स और समुंदर के बीच प्रियंका

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फिल्म : बेवॉच
निर्माता : इवान रेइतान, टॉम पोलक, ब्यू फ्लिन, ड्वेन जॉनसन, माइकल बर्क
निर्देशक : सेथ गॉर्डन
कलाकार : प्रियंका चोपडा, ड्वेन जॉनसन, जैक एफ्रॉन, अलेग्जेंड्रा

बॉलीवुड के देसी गर्ल प्रियंका चोपडा की पहली हॉलीवुड फिल्म बेवॉच रिलीज हो गई है। हालांकि टीवी में क्वॉन्टिको के जरिए से प्रियंका पहले ही अपने कदम जमा चुकी थी, लेकिन पर्दे की ही कुछ और होती है। बेवॉच एक हिट अमेरिकन टीवी सीरीज था और लोकप्रियता को देखते हुए इसी नाम से फिल्म बनाई गई। प्रियंका चोपडा की वजह से भारत में इसकी उत्सुका देखी जा रही है। आपको बता दें कि इस फिल्म में प्रियंका हीरोइन के तौर पर नही बल्कि एक खलनायिका भूमिका में है।  फिल्म की कहानी फ्लोरिडा के एक समुद्री किनारे से शुरू होती है। मिच (ड्वेन जॉनसन) बेवॉच के हेड है। उसकी कंपनी तीन नए लाइफगार्ड्स रखती है जिसमें मैट ब्रूडी (जैक एफरॉन) भी शामिल है। अपनी टीम में मैट के आने से मिच खुश नजर नहीं आता है। समुंदर किनारे कुछ लोगों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो जाती है। मिच को शक है कि हंटले क्लब की नई मालकिन विक्टोरिया लीड्स (प्रियंका चोपड़ा) क्लब की आड़ में ड्रग्स की स्मगलिंग करती है, लेकिन उसके पास कोई सबूत नहीं है। विक्टोरिया को अत्यंत शक्तिशाली और चालाक दिखाया गया है जिसने सभी से हाथ मिला लिया और जो तैयार नहीं हुए उन्हें रास्ते से हटा दिया, लेकिन मिच जैसे एक मामूली लाइफगार्ड उसका साम्राज्य हिला देता है। समुंदर का किनारा, खूबसूरत लड़कियां, ड्रग्स, अपराध जैसे चिर-परिचित फॉर्मूले होने के बाद भी यदि बेवॉच दर्शकों को बांध नहीं पाती है तो इसका पूरा दोष कहानी और स्क्रीनप्ले पर मढ़ा जा सकता है। एक घिसी-पिटी कहानी पर फिल्म बनाई गई है जिसका कोई ओर-छोर नहीं है। फिल्म के डायरेक्टर सेथ गॉर्डन ने इस प्रॉजेक्ट को शुरू करने से पहले स्क्रिप्ट और कहानी को बेहतर करने में ध्यान नहीं दिया। ऐसा लगता है जैसे फिल्म के प्रड्यूसर और डायरेक्टर ने पहले से यह सोच रखा हो कि जब टीवी पर यह शो सुपरहिट रहा और दर्शकों की हर क्लास में शो के प्रति गजब की दीवानगी रही है तो उसी शो पर बनी फिल्म हिट हो ही जाएगी। गॉर्डन का यही आत्मविश्वास उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बनकर रह गया। कहानी फ्लोरिडा के एक समुद्री किनारे से शुरू होती है। मिच (ड्वेन जॉनसन) बेवॉच के हेड है। उसकी कंपनी तीन नए लाइफगार्ड्स रखती है जिसमें मैट ब्रूडी (जैक एफरॉन) भी शामिल है। अपनी टीम में मैट के आने से मिच खुश नजर नहीं आता है। समुंदर किनारे कुछ लोगों की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो जाती है। मिच को शक है कि हंटले क्लब की नई मालकिन विक्टोरिया लीड्स (प्रियंका चोपड़ा) क्लब की आड़ में ड्रग्स की स्मगलिंग करती है, लेकिन उसके पास कोई सबूत नहीं है। विक्टोरिया को अत्यंत शक्तिशाली और चालाक दिखाया गया है जिसने सभी से हाथ मिला लिया और जो तैयार नहीं हुए उन्हें रास्ते से हटा दिया, लेकिन मिच जैसे एक मामूली लाइफगार्ड उसका साम्राज्य हिला देता है। समुंदर का किनारा, खूबसूरत लड़कियां, ड्रग्स, अपराध जैसे चिर-परिचित फॉर्मूले होने के बाद भी यदि बेवॉच दर्शकों को बांध नहीं पाती है तो इसका पूरा दोष कहानी और स्क्रीनप्ले पर मढ़ा जा सकता है। एक घिसी-पिटी कहानी पर फिल्म बनाई गई है जिसका कोई ओर-छोर नहीं है। फिल्म के डायरेक्टर सेथ गॉर्डन ने इस प्रॉजेक्ट को शुरू करने से पहले स्क्रिप्ट और कहानी को बेहतर करने में ध्यान नहीं दिया। ऐसा लगता है जैसे फिल्म के प्रड्यूसर और डायरेक्टर ने पहले से यह सोच रखा हो कि जब टीवी पर यह शो सुपरहिट रहा और दर्शकों की हर क्लास में शो के प्रति गजब की दीवानगी रही है तो उसी शो पर बनी फिल्म हिट हो ही जाएगी। गॉर्डन का यही आत्मविश्वास उनकी सबसे बड़ी कमजोरी बनकर रह गया।

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