क्या है श्रावण मास का महत्व

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श्रावण मास कहो या सावन का महीना कोई भी शब्द कानों में पड़ते ही ठंडक स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। ज्येष्ठ और आषाढ़ की भीषण गर्मी और तपिश से मुक्ति दिलाने हेतु श्रावण मास का आगमन होता है। श्रावण मास का इंतज़ार मनुष्य, पशु-पक्षी व प्रकृति ही नहीं करते अपितु देवताओं को भी इसका इंतजार रहता है। श्रावण मास में प्रतिदिन भगवान आशुतोष अर्थात् भगवान भोलेनाथ की उपासना का विधान पुराणों द्वारा बतलाया गया है। देवों के देव महादेव भगवान भोलेनाथ को श्रावण अत्यंत प्रिय है।
इसी कारण इस महीने में चन्द्रशेखर भगवान शिव की पूजा-अर्चना विशेष महत्व रखती है। जो कोई भी व्यक्ति किसी कारण वश प्रतिदिन श्रावण मास में पूजा नहीं कर सकता, उसे व समस्त शिव भक्तों को श्रावण के प्रत्येक सोमवार को पूजा व व्रत अवश्य करना चाहिए। वैसे भी सोमवार का दिन भगवान शंकर को अति प्रिय है और यही दिन शिव शंभू के मस्तक पर स्थान पाने वाले चन्द्र देव का भी माना जाता है। इसलिए सोमवार को शिव आराधना एवं उपासना अवश्य करनी चाहिए।

समुद्र मंथन के लिए समुद्र में मंदराचल को स्थापित कर वासुकि नाग को रस्सी बनाया गया। तत्पश्चात दोनों पक्ष अमृत-प्राप्ति के लिए समुद्र मंथन करने लगे। अमृत पाने की इच्छा से सभी बड़े जोश और वेग से मंथन कर रहे थे। सहसा तभी समुद्र में से कालकूट नामक भयंकर विष निकला। उस विष की अग्नि से दसों दिशाएँ जलने लगीं। समस्त प्राणियों में हाहाकार मच गया। तब शिव ने इस विष को गले में उतारा और नीलकंठ बने। असल में, इसमें भी छुपा संकेत है। शिव जी ने जैसे विष पिया वैसे ही हमें बुराइयों को अपने ऊपर हावी नहीं होने देना चाहिए।
यदि आपने पिछले साल शिव जी की उपासना नहीं की तो इस बार अवश्य करें। इस साल का पहला सावन का सोमवार 14 जुलाई को है और 21, 28, और 4 अगस्त तक रहेगा। इस दौरान कुँवारी लड़कियाँ सुंदर और अच्छे पति की कामना करती हैं। जिससे उन्हें एक अच्छा पति मिले। यही नहीं जो भी व्यक्ति इस माह में शिव जी की अराधना सच्चे मन से करता है उसे मन चाहा वरदान मिलता है साथी ही उसके सारे रोग और दरिद्रता भी दूर होती है।

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