शिक्षा विभाग को नहीं मिल रहे जरूरतमंद विद्यार्थी

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पाली। केंद्र सरकार की सामान्य वर्ग को दी जाने वाली एकमात्र छात्रवृति योजना नेशनल मीन्स कम मेरिट स्कॉलरशिप योजना में अभी तक आवेदन भरने वाले छात्र नहीं मिल रहे है। जिसके कारण शिक्षा विभाग के अधिकारियों को परेशानी हो रही हैं। सरकार की नेशनल मीन्स स्कॉलरशिप योजना मानव संसाधन एवं विकास मंत्रालय की ओर संचालित की जाती है। ये छात्रवृति वर्ष 2008 में शुरू की गई थी। जिसमें पूरे भारत में 1 लाख प्रतिभाशाली बच्चों को अध्ययन में आर्थिक सहायता देने का प्रावधान हैं। इसमें वे ही विद्यार्थी भाग ले सकते है जिनके अभिभावकों की वार्षिक आय 1.5 से कम हो। योजना में छात्रवृति कक्षा 9 से 12 तक दी जाती हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में अध्ययन करने वाले आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के प्रतिभाशाली बच्चों को प्रोत्साहित करना हैं। अधिकांश जगह आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण बच्चें कक्षा आठवीं में अध्ययन के बाद स्कूल छोड़ देते हैं। ऐसे में उन्हें वार्षिक 6 हजार देकर आर्थिक संबल दिया जाता हैं। पूरे भारत में 1 लाख बच्चों में से राजस्थान में 5471 बच्चों का चयन किया जाता हैं। परीक्षा के लिए पात्र विद्यार्थी सितम्बर माह में माध्यमिक शिक्षा कार्यालय से फॉर्म प्राप्त कर आवेदन कर सकते हैं। इसमें 10 नवंबर को जिला स्तरीय परीक्षा आयोजित होगी। परीक्षा में श्रेष्ठ बच्चों का चयन होगा। परीक्षा में केंद्रीय स्कूल, निजी विद्यालय, जवाहर नवोदय, कस्तूरबा गांधी आवासीय स्कूल और अन्य आवासीय स्कूल वाले आवेदन नहीं कर सकते हैं। छात्रवृति में चयनित होने वाले बच्चों को एसबीआई बैंक में सीधे छात्रवृति दी जाती हैं। राजकीय स्कूलों में कक्षा आठवीं में अध्ययनरत छात्रों की परीक्षा आयोजित होती हैं। जिसमें सामान्य वर्ग का बच्चा 40 प्रतिशत अंक लाकर पात्र हो सकता है वहीं एसटी और एससी वर्ग के लिए बच्चे 32 प्रतिशत अंक लाकर पास होने की श्रेणी में आते हैं। परीक्षा में बैठने के लिए विद्यार्थी को सातवीं में 50 प्रतिशत से ज्यादा अंक लाना अनिवार्य हैं। जिसमें आवेदन करने के बाद मानसिक योग्यता परीक्षा होगी। जिसमें 45 प्रश्न होते है। अंग्रेजी से 20 प्रश्न, गणित से 20 प्रश्न होंगे। वहीं शैक्षिक योग्यता परीक्षण में विज्ञान और सामाजिक के 35 प्रश्न और गणित से 20 प्रश्न पत्र होगा। दोनों पेपर 90-90 अंक के होंगे।

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