सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हो रही वकीलों की डिग्रियों की जांच

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जोधपुर। देश की सर्वोच्च न्यायालय के आदेश बाद देश में बीसीआई के सैकेट्री के माध्यम से जिस अधिवक्ता ने यूनिवर्सिटी से एलएलबी की है उस संबंधित यूनिवर्सिटी से डिग्रियों की जांच करवाई जा रही है।राजस्थान हाईकोर्ट के बीसीआई सैकेट्री नए व पुराने सभी अधिवक्ता अपनी-अपनी डिग्रियों का सत्यापन करवाने में लगे है।
मामले के अनुसार 2 मई 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश पारित किया कि जिन अधिवक्ता ने रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल करने का आवेदन किया गया है। उन सभी अधिवक्ताओं के डिग्रियों का वेरिफिकेशन बीसीआई को करवाने के निर्देश दिए गए है। जिसमें देश के सभी अधिवक्ताओं को अपने रजिस्ट्रेशन रिन्यूअल करवाने के लिए पहले अपनी डिग्री की जांच करवाई जा रही है। जिसके तहत बीसीआई जिला कार्यालय में पदस्थ कर्मचारियों के मुताबिक करीब 35 हजार से भी अधिक आवेदन अब तक प्राप्त हो चुके है। जिसमें से कई डिग्रियों की जांच भी होकर कार्यालय को प्राप्त हो चुकी है।
बीसीआई ने बनाया 2015 में रूल्स
बॉर कांउसिंल ऑफ इंडिया ने वर्ष 2015 में बीसीआई सर्टिफिकेट वैरिफिकेशन रूल्स जारी किया गया। इसके बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। जिस पर सर्वोच्च न्यायालय ने इसे सही करार देते हुए सभी अधिवक्ताओं के रिन्यूअल के समय डिग्री वैरिफिकेशन करवाने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही 23 अगस्त 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने दुबारा हुई सुनवाई में शीर्ष कोर्ट ने दुबारा आदेश पारित करते हुए बीसीआई को इस संबंध में समाचार पत्रों में विज्ञप्ति प्रकाशित करने के निर्देश दिए। जिसमें जोधपुर हाईकोर्ट बीसीआई ने 27 अगस्त को अधिवक्ताओं के रजिस्ट्रेषन रिन्यूअल बाबत विज्ञप्ति जारी की गई है।
यह है नियम
देश की समस्त हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ताओं को हर पांच साल में अपने रजिस्ट्रेशन को रिन्यूअल करवाया जाना अनिवार्य है। जिसमें वर्ष 2015 में बीसीआई ने इस संबंध में नया रूल्स जोड़ा गया। जिसमें अधिवक्ताओं को अपने सर्टिफिकेट के जांच करवाए जाना लागू किया गया था।

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