गहलोत और पायलट गुट में बटी कांग्रेस, भाजपा उठा रही फायदा

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जोधपुर। अजमेर उपचुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार के नामांकन के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन पायलट साथ-साथ नजर आए, लेकिन गहलोत ने आज अलवर में मुख्यमंत्री पद के दावेदारी को लेकर पायलट का नाम लिए बिना उन पर निशाना दाग दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेशाध्यक्ष बनते ही मीडिया मुख्यमंत्री बना देती है और वे मुख्यमंत्री बनने के सपने देखने लग जाते हैं।
गहलोत के तेवर देखकर एक बात तो साफ है कि वे पहले काफी कॉन्फिडेंट और पॉवरफुल नजर आ रहे हैं। हालांकि उनके आज के बयान से एकबारगी गहलोत व सचिन के बीच मुख्यमंत्री पद को लेकर विवाद फिर सामने आ गया। वहीं जोधपुर जिले में कांग्रेस पहले से बिखरी-बिखरी नजर आती है। यहां के लोकल जनप्रतिनिधि अशोक गहलोत व पीसीसी चेयरमैन सचिन पायलट में बंटी हुई है। कुछ नेता है जो मौका ताडक़र गहलोत व पायलट गुट के साथ-साथ दोनों को राजी रखे हुए हैं।
वर्तमान में हो रहे उपचुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी रघु शर्मा की रैली में कई नेता बिन बुलाए मेहमान की तरह अजमेर गए और सचिन पायलट व अशोक गहलोत से बारी-बारी मिले भी, कुछ महिला संगठन की नेता ना केवल तीनों रैलियों में पहुंची तो वहां से जयपुर जाकर सचिन पायलट से भी मिल आई, जबकि उन्हें गहलोत गुट का माना जाता है। इन नेताओं की हालत ये है कि वे गुजरात भी बिन बुलाए मेहमानों की तरह पहुंचकर गहलोत को भी मुंह दिखा आए कि हम आपके साथ हैं।
इस उठापटक में जोधपुर कांग्रेस कई बड़े मुद्दों को लेकर सडक़ों पर उतरकर संघर्ष नहीं कर पा रही है। वर्तमान में रिफाइनरी, किसानों को समर्थन मूल्य की खरीद जल्द बंद करना व बिजली पूरी नहीं मिलने के साथ जोधपुर के विकास का रथ गत चार साल में ठप्प होने जैसे कई मुद्दे है, जिन पर देहात व शहर कांग्रेस एक जुट नहीं हो पा रहे है। रिफाइनरी का दोबारा शिलान्यास 16 जनवरी को प्रधानमंत्री करने जा रहे है लेकिन इसके विरोध की रणनीति शहर कांग्रेस संगठन महज आज शाम केवल हल्के प्रदर्शन की औपचारिकता पूरी करती नजर आ रही है। रिफाइनरी की बात करे तो रिफाइनरी बचाओ संघर्ष समिति तो जैसे नदारद ही लग रही है।
केवल छात्र राजनीति से राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचे और बाड़मेर के पूर्व सांसद हरीश चौधरी और पूर्व विधायक मदन प्रजापत ही विरोध करने सामने आए। जोधपुर व जोधपुर बाड़मेर मार्ग पर कुछ पोस्टर कांग्रेस का विरोध जताने का प्रयास कर रहे है लेकिन सबसे बड़ी चर्चा तो ‘अगली सरकार पायलट की सरकार’ जैसे पोस्टर भी गहलोत के शहर में लगे है। इससे ही तो पायलट व गहलोत के बीच मतभेद व जोधपुर में गुटबाजी स्पष्ट नजर आ रही है। इसका मोटा कारण ये भी है कि ना तो पायलट जोधपुर जिले की कांग्रेस संगठन को बदलने की हिम्मत कर पा रहे है और ना ही गहलोत ही जोधपुर कांग्रेस के ढांचे को बदलकर ताकतवर बनाने के मूड में दिखाई देते है। ये ही कारण है कि जोधपुर जिले की कांग्रेस मृतसन्न ही लग रही है और जनता सरकार विरोधी होने के बाद भी कांग्रेस की मृतासन्न अवस्था में उसे स्वीकार करने के मूड में नहीं नजर आती, ये ही कारण है कि वो भाजपा के हर कार्यक्रम में जोधपुर का विकास टटोलने के लिए भीड़ के रूप में एकत्रित हो रही है।

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