एमसीआई की रिपोर्ट अटका सकती है प्रदेश के 7 मेडिकल कॉलेज

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तीन साल में न तो फैकल्टी पूरी लगा पाए, ना ही रेजिडेंट्स
जोधपुर। प्रदेश की मेडिकल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सरकार भले ही कितने ही दावे कर रही हो, लेकिन मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के निरीक्षण में सरकारी तैयारियों की असलियत सामने आ गई। इससे एक बार फिर राजस्थान की छवि मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में खराब हुई है। पिछले तीन वर्षों से सरकार पाली समेत जिन सात मेडिकल कॉलेजों के लिए हर बजट सत्र में घोषणा करती रही है, उनमें ही एमसीआई ने 110 से ज्यादा कमियां निकाली हैं और इनमें एडमिशन देने से इनकार कर दिया है। एमसीआई
ने सभी मेडिकल कॉलेज की कमियों की रिपोर्ट केन्द्र सरकार को भेज दी है।
अब सरकार तय करेगी कि किस तरह इन्हें दूर कराया जा सकता है। केन्द्र नए आदेश भी जारी कर सकता है और कुछ समय देकर एमसीआई को फिर से निरीक्षण के लिए कह सकता है। दूसरी ओर केन्द्र सख्ती बरतते हुए मान्यता पर तलवार भी चला सकता है। अभी गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों की स्थिति बेहतर नहीं है। सरकार का दावा है कि आने वाले कुछ समय में यहां सभी सुविधाएं दे दी जाएगी। लेकिन यदि केन्द्र ने आपत्ति जता दी तो न केवल यहां सीटों का नुकसान होगा बल्कि प्रदेश मेडिकल एजुकेशन के क्षेत्र में एक बार फिर पिछड़ जाएगा।

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