गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी नहीं घटाएगी सरकार : एक्सपर्ट्स

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नई दिल्ली। बैंकर्स और ऐनालिस्ट्स का मानना है कि सरकार गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी नहीं घटाएगी। वहीं इंडस्ट्री आगामी बजट में गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने के लिए सरकार पर दबाव डाल रही है। सरकार का मानना है कि अगर वह इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती करती है तो इससे सोने और क्रूड ऑयल के इंपोर्ट में बढ़ोतरी हो सकती है जिससे ट्रेड डेफिसिट और बढ़ सकता है। भारत का ट्रेड डेफिसिट (व्यापार घाटा) पहले ही दिसंबर 2017 में तीन साल के उच्चतम स्तर 14.88 अरब डॉलर पर पहुंच चुका है।
अभी जो सिचुएशन है, उसमें सरकार के पास गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाने की कोई गुंजाइश नहीं है। गोल्ड पर अभी 10 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी लग रही है। तेल का इंपोर्ट बिल बढ़ रहा है और ऐसे में सरकार को रेवेन्यू बढ़ाने की जरूरत है। गोल्ड ट्रेडर्स का कहना है कि गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी बढऩे से इसकी स्मगलिंग बढ़ जाती है। हालांकि स्मगलिंग से देश में हर साल कितना सोना आता है, इसके कोई अधिकारिक आंकड़े नहीं है। देश में हर साल 100 से 120 टन सोना स्मगलिंग के जरिए आता है। ग्लोबल लेवल पर सोने की कम कीमत और घरेलू डिमांड बढऩे से भारत का गोल्ड इंपोर्ट दिसंबर में 71.52 प्रतिशत बढक़र 3.39 अरब डॉलर पर पहुंच गया था। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में अनुमान जताया कि 2017 के मुकाबले 2018 में दुनियाभर में गोल्ड की अधिक डिमांड देखने को मिलेगी। काउंसिल का कहना है कि भारत में नोटबंदी और जीएसटी (गुड्स एंड सर्विस टैक्स) के शुरुआती झटके के बाद अब इसका इकनॉमी पर पॉजिटिव प्रभाव होगा, जिससे गोल्ड की मांग में तेजी आएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्रुड ऑयल की कीमतें तय करेंगी कि सरकार गोल्ड पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाती है या नहीं। पिछले तीन महीनों में डब्ल्यूटीआई की कीमतों में 28 प्रतिशत और ब्रेंट ऑयल में 25 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई है। वहीं इस दौरान एमसीएक्स पर तेल की कीमतों में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखने को मिली है। मंगलवार को ब्रेंट क्रुड की कीमत 70 बैरल डॉलर पर पहुंच गई थी, जो 2014 के बाद से सबसे उच्चतम स्तर है।
बाजार इस तथ्य की अनदेखी कर रहा है कि अमेरिका का तेल उत्पादन नए उच्च स्तर पर पहुंच गया है। 2018 के पहले क्वॉर्टर में यह जल्द 10 एमबीपीडी पर पहुंच सकता है। फरवरी से मार्च के दौरान रिफाइनरीज मेंटेनेंस पर जाएंगी, जिससे इनवेंटरी बढऩे पर तेल की कीमतों पर प्रेशर बनेगा। माल्या ने कहा कि अमेरिका में बढ़ता तेल उत्पादन और रिफाइनरी मेंटेनेंस, ऐसे दो कारण हैं जो तेल की कीमतों में उछाल पर रोक लगा सकते हैं।

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