नहीं मिला बजट, एमजीएच ओपीडी इमरजेंसी प्रोजेक्ट अधर झूल में

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सरकार को भेजा था प्रस्ताव, 20 त्न काम के लिए चाहिए 10 करोड़ अतिरिक्त
जोधपुर। संभाग के सबसे बड़े गांधी अस्पताल में प्रदेश के सबसे बड़े ओपीडी व इमरजेंसी भवन प्रोजेक्ट का 80 प्रतिशत काम पूरा होते-होते बजट ही खत्म हो गया। बाकी बचे 20 प्रतिशत काम के लिए 10 करोड़ रुपए की डिमांड सरकार से की गयी थी। सार्वजनिक निर्माण विभाग ने वर्तमान बजट से काफी समय पहले प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था लेकिन सरकार को राज्य के दूसरे बड़े शहर जोधपुर की जैसे परवाह ही नहीं। ये ही नहीं जिले के 9 भाजपा विधायक भी इसके लिए मौन धारण दिए हुए ही रहे। नतीजा ये निकला गांधी अस्पताल के इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पूरा होने में ही अगली सरकार का इंतजार करना पड़ सकता है।
इस प्रोजेक्ट की नींव तत्कालिन अशोक गहलोत सरकार ने सितम्बर 2011 में रखी गयी, वह दिसम्बर 2012 तक हर हाल में पूरा हो जाना था लेकिन प्रोजेक्ट की डिजाईन में बार-बार बदलाव करने में ये पूरा नहीं हो पाया। यहां नक्शा बदलकर पार्किंग बनाने का काम शुरू कर दिया गया। 12 करोड़ की जगह ये प्रोजेक्ट तक 16 करोड़ 48 लाख हो गया, सरकार ने ये बजट भी मंजूर कर दिया। उसके बाद भी जब काम अधूरा रहा तो 10 करोड़ रुपए का रिवाइज्ड एस्टीमेट सार्वजनिक निर्माण विभाग ने बनाकर सरकार को भेजा तो इसे वर्तमान 2018-19 के बजट में स्वीकृत होने की उम्मीद थी जो नहीं हो सका। 214 गुणा 190 वर्ग फीट में बन रही इस बिल्डिंग जिस पर अब वित्तिय स्वीकृति कैसे जारी होगी ये प्रश्न सोचनीय है। इसके निर्माण का ठेका जयपुर की मैसर्स एएल लाल पुलिया को दिया गया था। जिसका भी भुगतान अटका होने से वो आगे काम करने से हाथ पहले ही खींच चुकी हे। मामला तो ये भी बनता है कि 16 करोड़ 48 लाख रुपए का बजट मिलने के बाद भी भूमिगत पार्किंग निर्माण में ही पूरा बजट लगता चला गया तो सानिवि के अभियंता क्या जांच कर रहे थे। हालत ये है कि निर्माण कंपनी ने जो गारंटी का समय दिया था वो तो अधूरे निर्माण में ही पूरा हो चुका है।
अधिकारी ने कहा
फिनिशिंग का काम बाकी है। बजट आयेगा तब ही सानिवि काम शुरू करने की बात कह रहा है
डॉ. पी.सी. व्यास,
अधीक्षक गांधी अस्पताल, जोधपुर

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