एमजीएच: 25 साल से नहीं बदला मरीजों का डाइट बजट, प्रति मरीज मात्र 50 रुपए

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मरीजों के मॉड्यूलर कीचन का प्रस्ताव सरकार को भेजा, नाश्ता, लंच, इवनिंग टी और डीनर की मिलेगी सुविधा

जोधपुर. पिछले एक दशक में मंत्रियों, सासंदों व राज्य कर्मचारियों का वेतन, महंगाई भत्ता कई बार बढ़ चुके है, लेकिन महात्मा गांधी अस्पताल के मरीजों की डाइट के बजट में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। जबकि इन सालों में महंगाई बढऩे की वजह से दालों, दूध ,आटे तक के भाव कई गुणा बढ़ चुके है। हालांकि एमजीएच प्रशासन ने डाइट में सुधार करने के लिए मॉड्यूलर कीचन का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। जो करीब 15 करोड़ का होगा। इस कीचन के बनने के बाद मरीजों को सुबह का नाश्ता, दोपहर का लंच, शाम की टी व रात के डीनर की आधुनिक पांच सितारा होटल की तरह वितरित करने का प्रस्ताव है, लेकिन एमजीएच को लेकर अब तक भेजे गए प्रस्तावों को सरकारें लंबित फाइलों में डाल देती है। मरीजों की डाइट का बजट वर्तमान महंगाई के हिसाब से देने के बजाय दस साल में एक पैसा भी नहीं बढ़ाया गया है। इससे डाइट के जायके से लेकर गुणवत्ता पर असर पडऩे लगा है। जो कि अस्पतालों में भर्ती मरीजों के साथ ज्यादती है। सरकारी अस्पतालों में 70 प्रतिशत मरीज गरीब व ग्रामीण क्षेत्र से होते है, जिन्हें सरकार द्वारा दी जा रही रोटी दाल पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
सांसद, विधायक और कर्मचारियों की झोली भरी, मरीज खाने को तरस रहे
एक रिपोर्ट के अनुसार गत दस सालों में प्रदेश के विधायकों, सांसदों के वेतन भत्ते 40 फीसदी बढ़ गए, राज्य कर्मचारियों का वेतन 60 फीसदी व महंगाई भत्ता यानि डीए 150 प्रतिशत बढ़ गया। सातवां वेतनमान मिलने के बाद इस वर्ग की झोली नोटों से भर गयी है। लेकिन मरीजों की डाइट के लिए मिलने वाले बजट पर जैसे महंगाई का कोई फर्क ही नहीं पड़ा है। बाजारों में दाल-आटा-घी-तेल-सब्जी के भाव आसमान छू रहे है। लेकिन मरीजों को मिलने वाली 100 ग्राम दाल के लिए आज भी 4 रुपए ही मिलते है, एक रोटी के लिए 30 ग्राम आटे के एक रुपया, 125 मिलीग्राम चाय के 2 रुपए ही मिल रहे है। हालांकि एक थैली मरीजों के लिए दूध की तय है। जिस समय ये तय की गई थी तब इसकी कीमत 6.80 रुपए थी, आज ये 38 रुपए हो गई। ऐसे में मरीजों को अस्पताल एक थैली में चार जनों को दूध सप्लाई कर रहा है।
विधानसभा में किसी भी जनप्रतिनिधि ने नहीं उठाया मुद्दा
गत 25 वर्ष से मरीजों की डाइट का बजट 50 रुपए ही है। इसमें कोई इजाफा नहीं हुआ है। जबकि भरपेट थाली लेकर किसी या रेस्तरां में जाने पर 150 रुपए तो लग ही जाते है। हालत ये है कि एक फल प्रति मरीज को देने का प्रावधान है, लेकिन इसके लिए बजट 4 रुपए ही तय है। 4 रुपए में तो आज एक केला भी उपलब्ध नहीं हो रहा है। इस डाइट चार्ट को लेकर जनप्रतिनिधियों व मंत्रियों ने विधानसभा में मरीजों की आवाज को आज तक नहीं उठाया है। ये ही कारण है कि मरीज इलाज के दौरान जैसा मिलता है वो खाकर पेट भरकर जल्द ठीक होकर घर जाने की सोचता है।
अधीक्षक बोले
मॉड्यूलर कीचन का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। मरीजों का डाइट बजट तो 25 साल से वो ही है।
डॉ. पीसी व्यास, अधीक्षक, एमजीएच

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