दादा ने क्यों लिया था आईपीएल न खेलने का फैंसला?

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नई दिल्ली। टीम इंडिया के दिग्गज कप्तानों में से एक रहे सौरव गांगुली हाल ही मैं अपनी किताब ‘ए सेंचुरी इस नॉट इनफ’ को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। इस बीच अपनी इस किताब में उन्होंने आईपीएल 2012 को लेकर एक बेहद ही चौंकाने वाला खुलासा करके सबको हैरान कर दिया है। गांगुली की आईपीएल में शुरुआत कोलकाता नाइट राइडर्स की ओर से हुई थी और उन्होंने पहले तीन सीजन इस टीम की कप्तानी भी की। हालांकि वह न तो कप्तानी और न ही बल्लेबाजी से कोई कमाल कर पाए। इसका प्रभाव यह रहा कि 2012 में कोलकाता ने उन्हें नहीं खरीदा लेकिन पुणे वॉरियर्स के मालिक सुब्रत रॉय ने उन पर भरोसा जताया और उन्हें अपनी टीम में शामिल किया। पुणे ने उन्हें अपनी टीम का कप्तान बनाए जाने का ऐलान कर दिया। लेकिन गांगुली को इस बात की जरा भी भनक नहीं थी। वह इस बात को सुनकर हैरान रह गए थे। उन्होंने अपनी किताब में उस घटना का जिक्र करते हुए लिखा है, फ्रेंचाइजी पुणे के नेता सुब्रत रॉय द्वारा जब उन्हें कप्तान बनाया गया था तो वे काफी घबरा गए थे। यह मेरी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था। मैं बस उस वक्त यह समझने की कोशिश कर रहा था कि वह यह क्या कर रहे हैं? गांगुली ने कहा मैं सोच रहा था कि कैसे उस क्षति की पूर्ति होगी जो कि सुधार योग्य नहीं है। रॉय ने बोर्ड से कहा कि उनका फैसला अंतिम है। मुझे एक ग्रुप का नेता बनना था जिसे न तो मैंने चुना था और न ही उसे मजबूत करने में सक्षम था। साल 2011 में पुणे वॉरियर्स ने युवराज सिंह को खरीदा था और उन्हें टीम के कप्तान के तौर पर नियुक्त किया गया था। युवराज सिंह की बात करते हुए सौरव गांगुली ने किताब में लिखा मैं दुविधा में था क्योंकि मैं उस इंसान को रिपलेस करने जा रहा था, जिसने कुछ महीने पहले मुझे आश्रय दिया था। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या प्रतिक्रिया दूं। इन सब चीजों को दरकिनार करते हुए मैंने उन क्षेत्रों पर ध्यान देने का फैसला लिया, जिन पर मैं नियंत्रण रख सकता था। मैंने खुद से कहा कि मैं अब आईपीएल नहीं खेलूंगा। मुझे इस पर विचार करने में करीब एक महीना लग गया लेकिन मेरे अंदर की आत्मा ने मुझसे कहा कि बस अब समय आ गया है।

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