मूक बधिर बच्चों के रहने-खाने का मामला : न्यायमित्रों ने पेश की रिपोर्ट, हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

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जोधपुर। शहर में संचालित गांधी बधिर सीनियर सैकंडरी स्कूल के अवासीय छात्रावास में रहने वाले करीब 115 मूक-बधिर बच्चों के खाने व रहने की सुविधा को लेकर न्यायमित्रों ने बुधवार को राजस्थान हाईकोर्ट में अपनी रिपोर्ट पेश की। इस रिपोर्ट पर हाईकोर्ट ने अतिरिक्त राजकीय महाधिवक्ता पीआर सिंह से सवाल करते हुए जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए है। मामले की अगली सुनवाई अब 23 अप्रेल को होगी।
गत दिनों राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप मेहता ने गांधी बधिर सीनियर सैकंडरी स्कूल के अवासीय छात्रावास में रहने वाले मूक-बधिर बच्चों के खाने व रहने को लेकर समाचार पत्रों में छपी खबर पर संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार जवाब तलब किया था। कोर्ट ने वेलफेयर सैकेट्री व जिला कलेक्टर को नोटिस जारी करते हुए 14 मार्च तक जवाब प्रस्तुत करने को कहा था। इसके साथ ही इस मामले में अधिवक्ता संदीप शाह व अनिरूद्ध पुरोहित को न्यायमित्र नियुक्त किया था। बुधवार को न्यायमित्र शाह ने इस मामले में हाईकोर्ट को बताया कि गांधी मूक-बधिर संस्था के अध्यापकों का वर्तमान में वेतन केवल चार हजार रुपए है जिस पर कोर्ट ने उसको गंभीरता से लेते हुवे अतिरिक्त महाधिवक्ता पीआर सिंह को इस मामले में जवाब देने को कहा है। मामले को लेकर हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई की तारीख 23 अप्रेल नियुक्त की है।
यह है मामला : गांधी बधिर स्कूल के छात्रावास में कुल 115 मूक बधिर बच्चों को खाने रहने की व्यवस्थाओं के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से दी जाने वाली 25 लाख रुपए की ग्रांट इस बार आठ माह से रोकी हुई है। जिसका कारण निरीक्षण में मिली कमियों को बताया गया था। इस कारण संचालन करने वाली संस्था जोधपुर बधिर कल्याण समिति ने इन महीनों में बच्चों के खाने-पीने की व्यवस्था उधार में पैसे लाकर की थी। इसके बाद उधार देने वाले भी तकाजा करने लगे और दिन ब दिन हालात जवाब दे रहे थे। इतना ही नहीं, इन बच्चों की जिम्मेदारी संभालने वाले स्टाफ तक को 4 महीनों से तनख्वाह नहीं दी गई है। गत सप्ताह इस संबंध में समाचार पत्रों में खबर प्रकाशन के बाद हाईकोर्ट जस्टिस संदीप मेहता ने मामले में संज्ञान लेकर राज्य सरकार को कडी फटकार लगाने के साथ ही जवाब तलब किया था।

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