वोडाफोन-आईडिया को मर्जर से पहले चुकाने होंगे बकाया 18870 करोड़ रुपये

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नई दिल्ली। टेलिकॉम डिपार्टमेंट जल्द ही वोडाफोन इंडिया और आइडिया सेल्युलर से कह सकता है कि वे मिलकर करीब 3 अरब डॉलर यानी लगभग 18870 करोड़ रुपये का बकाया चुकाएं। डिपार्टमेंट यह रकम लंबित लाइसेंस फीस, स्पेक्ट्रम यूसेज चार्जेज और वन-टाइम स्पेक्ट्रम चार्जेज से जुड़े बकाये के संबंध में मांग सकता है। मामले की जानकारी रखने वालों ने बताया कि विभाग इन दोनों कंपनियों के मर्जर को मंजूरी देने के लिए इस रकम के भुगतान की शर्त रख सकता है। वोडाफोन इंडिया की लाइसेंस फीस और एसयूसी का बकाया (इन मदों में सीएजी की जुलाई 2017 की रिपोर्ट में दर्ज अतिरिक्त बकाये सहित) करीब 5532 करोड़ रुपये का है, जबकि इसका वन टाइम स्पेक्ट्रम चार्ज बकाया लगभग 3600 करोड़ रुपये का है। आइडिया का टोटल लाइसेंस फीस/एसयूसी बकाया (इन मदों में सीएजी की जुलाई 2017 की रिपोर्ट में दर्ज अतिरिक्त बकाये सहित) लगभग 7625 करोड़ रुपये है, जबकि इसका ओटीएससी बकाया 2113 करोड़ रुपये का है। टेलिकॉम कंपनियों का एजीआर वह रेवेन्यू है, जो लाइसेंस्ड सर्विस से हासिल होता है। आमतौर पर टेलिकॉम कंपनियां एजीआर का 8 पर्सेंट हिस्सा लाइसेंस फीस के रूप में और लगभग 5 पर्सेंट हिस्सा एसयूसी के रूप में चुकाती हैं। ये दोनों ही सरकार के लिए रेवेन्यू के अहम जरिए हैं। 100 पर्सेंट एफडीआई के लिए मंजूरी मांग रही आइडिया दोनों कंपनियों की ओर से विभाग से बातचीत कर रही है ताकि कुल बकाया की वह रकम तय की जा सके, जिसे दोनों कंपनियों को मर्जर को मंजूरी मिलने से पहले चुकाना होगा। इसकी वजह यह है कि वोडफोन इंडिया के साथ विलय के बाद आइडिया ही लाइसेंसी बनी रहेगी।

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