सरकार ने की आसाराम केस का फैसला जेल में ही सुनाने की अपील

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समर्थकों के बड़ी तादाद में जोधपुर में जुटने की आशंका से पुलिस-प्रशासन की नींद उड़ी
कानून व्यवस्था बिगडऩे की आशंका के मद्देनजर राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में दायर की अपील
जोधपुर। अपने ही गुरुकुल की नाबालिग छात्रा से यौन शोषण के आरोपी आसाराम पर हाईकोर्ट 25 अप्रेल को फैसला सुनाएगा। इस दिन देशभर से बड़ी तादाद में आसाराम के समर्थकों के जोधपुर में जमावड़े की आशंका को लेकर पुलिस चिंतित है। इसे लेकर राज्य सरकार ने शुक्रवार को हाईकोर्ट में एक अपील दायर कर इस मामले का फैसला जेल में ही आसाराम के समक्ष सुनाने का आग्रह किया है। जिस पर हाईकोर्ट ने आसाराम के वकील से अपना जवाब मांगा है। पुलिस की चिंता का सबसे बड़ा कारण यह है कि हाल ही में डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक मामले में सजा सुनाए जाने के बाद उसके समर्थकों ने जमकर हिंसा की थी। पंचकूला व सिरसा में हिंसा और पुलिस की फायरिंग में 30 लोग मारे गए थे। वहीं 30 अगस्त 2013 को आसाराम की गिरफ्तारी के बाद से अब तक 9 गवाहों पर जानलेवा हमले हो चुके हैं। जिनमें से 4 की हत्या कर दी गई। एक गवाह पर तो हाईकोर्ट परिसर में जानलेवा हमला हो चुका है। इतना ही नहीं इन साढ़े चार सालों में आसाराम के समर्थकों पर उत्पात मचाने के 69 मामले में दर्ज हो चुके है। इससे साफ जाहिर है कि आसाराम के समर्थक रामरहीम के समर्थकों से भी ज्यादा खतरनाक है। इसे देखते हुए ही पुलिस व सरकार ने फैसला जेल में सुनाने की अपील दायर की है।
एक लाख से अधिक समर्थकों के जोधपुर में जुटने की आशंका
स्थानीय पुलिस प्रशासन को आशंका है कि 25 अप्रेल को फैसला सुनाए जाने के दौरान आसाराम के बडी संख्या में समर्थकों के जोधपुर आने की संभावना है।अनुमान के मुताबिक यह संख्या एक लाख को पार कर सकती है। ऐसे में कानून व्यवस्था बनाए रखने में दिक्कत आ सकती है। इसे ध्यान में रख राज्य सरकार ने शुक्रवार को एक हाईकोर्ट में एक अपील कर इस फैसले को जेल के भीतर ही सुनाए जाने की अपील की। उनका तर्क था कि आसाराम के समर्थकों की बड़ी संख्या के कारण शहर की कानून व्यवस्था गड़बड़ा सकती है। आसाराम के समर्थकों के कारण शहर के लोगों को परेशान नहीं किया जा सकता है।
साढ़े चार साल से जोधपुर में उत्पात मचा रहे आसाराम के समर्थक
आसाराम साढ़े चार साल से जोधपुर जेल में बंद है। इस अवधि में आसाराम को कोर्ट में पेश किए जाने के दौरान देशभर से बड़ी संख्या में उनके समर्थक जोधपुर आते रहे है। आसाराम के अंनियत्रिंत समर्थक हमेशा पुलिस के लिए परेशानी का सबब बने रहे। समर्थकों को काबू में करने को पुलिस ने कई बार लाठियां बरसाकर उन्हें खदेडऩा पड़ा है, लेकिन इनकी संख्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है। कई मौके पर हजारों समर्थक शहर में उमडते देख जा चुके है।
आसाराम के वकील ने किया फैसला जेल में सुनाने की अपील का विरोध
आसाराम के वकील महेश बोड़ा ने इसका प्रतिवाद किया और कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। जब सुनवाई नियमित कोर्ट में हो सकती है तो फैसला भी वहीं पर सुनाया जा सकता है। दोनों पक्ष को सुनने के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश गोपालकृष्ण व्यास और न्यायाधीश रामकृष्ण सिंह की खंडपीठ ने उनसे लिखित में अपना जवाब पेश करने को कहा। बोड़ा ने इसके लिए थोड़ा समय मांगा। खंडपीठ ने उनसे मंगलवार तक अपना जवाब पेश करने को कहा है। अगली सुनवाई मंगलवार को ही होगी।
प्रावधान: विशिष्ट मामलों में हो सकते हैं जेल में फैसला सुनाने के आदेश
कुछ विशिष्ट मामलों में हाईकोर्ट जेल में फैसला सुनाने का आदेश जारी कर सकता है। आसाराम समर्थकों के शहर में बढ़ते उत्पात को ध्यान में रख हाईकोर्ट पूर्व में इस मामले की सुनवाई जेल में कराने का आदेश जारी कर चुका है। बाद में आसाराम की अपील पर उन्हें कुछ शर्तों की पालना करने पर ही नियमित कोर्ट में सुनवाई का हाईकोर्ट ने आदेश दिया था। आसाराम के वकील महेश बोड़ा का मानना है कि हाईकोर्ट ऐसा आदेश जारी कर सकता है, लेकिन उसकी एक प्रक्रिया है। इसके लिए पहले उसे नोटिफिकेशन जारी करना पड़ता है। इस मामले में इसकी पालना नहीं की गई। सिर्फ फैसले के लिए कोर्ट को जेल में शिफ्ट नहीं किया जा सकता है।

रामरहीम के समर्थकों ने मचाई थी हिंसा, 30 की हुई थी मौत
पिछले साल अगस्त में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक रेप केस में चंडीगढ़ की एक अदालत ने दोषी करार दिया था। इसके बाद उनके समर्थक हिंसा पर उतर आए थे। इस कारण 30 लोग मारे गए थे और व्यापक स्तर पर तोडफ़ोड़ होने से भारी नुकसान हुआ था। इसके बाद अदालत ने सजा का एलान जेल में ही कोर्ट लगाकर किया गया था, ताकि कानून व्यवस्था न बिगड़े। पुलिस अब आसाराम के समर्थकों से घबरा कर जेल में ही सजा का फैसला सुनवाना चाहती है, ताकि समर्थकों को आसानी से नियंत्रित रखा जा सके।

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