पहले टेस्ट के बाद क्रिकेट छोड़ना चाहते थे सचिन तेंदुलकर

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नई दिल्ली: क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने पिछले महीने ही अपना 45वां जन्म दिन मनाया। मैदान पर हमेशा अपने शांत मिजाज के लिए जाने जाने वाले तेंदुलकर रियल लाइफ में भी क्या इतने ही शांत हैं, इस बात का खुलासा सचिन ने एक इंटरव्यू के दौरान किया है। यहीं नहीं अपने क्रिकेट करियर के दौरान हासिल हुए कई अनुभवों को भी तेंदुलकर ने इस इंटरव्यू के दौरान साझा किया। अपने पहले मैच के बारे में बात करते हुए सचिन ने बताया, ‘अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में मेरी पहली पारी कराची (पाकिस्तान) में थी। तब मुझे लगा था कि यह शायद मेरी जिदंगी की पहली और आखिरी इनिंग है। मुझे लगा अब कुछ नहीं हो सकता क्योंकि यह (खेलना) मेरे बस की बात नहीं है शायद। पहले मैच में मुझे कुछ पता नहीं लग रहा था कि क्या हो रहा है। एक तरफ से वकार यूनिस बॉलिंग कर रहे थे तो दूसरी तरफ से वसीम अकरम। मुझे कुछ ज्यादा आइडिया नहीं था और वो गेंद को रिवर्स स्विंग भी करा रहे थे। अचानक जाकर ऐसे अटैक के सामने खेलने को लेकर मेरे पास कोई प्लान नहीं था।’पहली इनिंग के बारे में बात करते हुए तेंदुलकर ने बताया, ‘जब मैं ड्रेसिंग रूम में वापस आया तो मुझे लगा ये मेरे बस की बात नहीं है। मैंने ड्रेसिंग रुम के कई साथियों से इस बारे में बात की। सबने कहा कि थोड़ा समय दो, ये मत सोचों कि पहली बॉल से मारना ही शुरू करना है। यह इंटरनेशनल क्रिकेट है और आप शायद विश्व के सबसे बेहतर बॉलिंग अटैक के सामने खेल रहे हैं। थोड़ा रेसपेक्ट तो बॉलर्स को देनी पड़ेगी बाद में चीजें अपने आप होना शुरू हो जाएंगी।’
ड्रेसिंग रूम के साथियों द्वारा दी गई सलाह पर अमल करते हुए तेंदुलकर ने कराची के बाद फैसलाबाद में खेले गए दूसरे टेस्ट में वापसी की। इस टेस्ट के बारे में बात करते हुए सचिन ने बताया, ‘कराची टेस्ट के बाद दूसरा टेस्ट फैसलाबाद में खेला गया था और इसकी पहली इनिंग में मैंने 59 रन बनाए थे। इसके बाद जब मैं ड्रेसिंग रूम में वापस आया तो मैंने खुद से कहा, तूने कर दिखाया और तू कर सकता है।’टीम में अनुशासन को लेकर बात करते हुए तेंदुलकर ने बताया कि शुरूआती दौर में मैं समय को लेकर इतना पाबंद नहीं था लेकिन जब टीम मेट्स ने ध्यान दिलाया तो चीजें बदलनी शुरू हो गई और बाद में मैं हमेशा समय से 5-7 मिनट पहले डेस्टिनेशन पर पहुंच जाता था।

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