27 साल बाद 250 कर्मचारियों के घरों में लौटी खुशी, सुप्रीम कोर्ट से मिला न्याय

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जोधुपर। एलआईसी के कर्मचारियों को 27 साल बाद कानूनी लडाई का दौर आखिर का खत्म हुआ। इन अस्थाई कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट ने स्थाई करने के आदेश 11 मई को सुप्रीम कोर्ट की वृहद पीठ ने फैसला सुनाया है। जिसमे उक्त मामले में सभी अस्थाई कर्मचारियों को स्थाई करने के आदेश जारी किए है। पूर्व में राजस्थान के 250 कर्मचारियों की लडाई एलआईसी से अस्थाई से स्थाई करने को लेकर जारी थी। जिसमें इन सभी को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद खुशी की लहर छाग गई है। जहां उनकी जवानी इस आस में गुजर गई कि कभी ना कभी तो उनके साथ न्याय होगा। इन कर्मचारियों ने नौकरी और हक के लिए लड़ते हुए न्यायालय के दरवाजे खटखटाते रहे और आखिरकार उनके बच्चों की जवानी की चिंता को दूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला उनके हक में सुनाया।
मामले के अनुसार 1985 से लेकर 1991 तक अस्थाई तौर पर भारतीय जीवन बीमा कंपनी निगम मैं अस्थाई तौर पर कार्य कर रहे देशभर के 8000 कर्मचारियों को जो 85 दिन तृतीय श्रेणी कर्मचारी और चतुर्थ श्रेणी 70 दिन जिन लोगों ने काम किया उन कर्मचारियों को भारतीय जीवन बीमा ने हटा दिया। यह 8000 कर्मचारी अपने हक की लड़ाई के लिए लगातार न्यायालय में अपना हक रखते हुए न्याय की गुहार लगाते रहे और 18 मार्च 2015 दिल्ली सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया कि इन व्यक्तियों को एलआईसी नौकरी पर वापस लेने का आदेश दिया। लेकिन वकीलों ने पक्ष रखते हुए इन कर्मचारियों के इतने सालों का वेतन देने में असमर्थता जताते हुए मना कर दिया। जिसके बाद भी 8000 कर्मचारी लगातार अपने हक के लिए लड़ते रहे और आखिरकार यह ऑल इंडिया नेशनल लाइफ इंश्योरेंस एम्लाईज फैडरेशन ने कोर्ट से लड़ाई जीतकार 25 सौ कर्मचारियों 11 मई 2018 को न्यायधीपति कुरियान जोसफ ने आदेश पारित किया कि इन कर्मचारियों को 21 अगस्त से पहले अपनी पूरी प्रक्रिया कर स्थाई कर्मचारियों के रूप में लेवे।
साथ ही यह आदेश दिया कि इन कर्मचारियों को एरियर का 50: भुगतान करें और इन कर्मचारियों को वरीयता के हिसाब से जिन लोगों का प्रमोशन होना उनका प्रमोशन के हिसाब से भी इनका भुगतान करें। इस ऐतिहासिक कानूनी जंग कर्मचारी नेता राजेश निम्बालकर तथा बी एन पी श्रीवास्तव इनके नेतृत्व में 27 साल लड़ी गई।जिसमे ऑल इंडिया नेशनल लाइफ इंशुरंस एम्पलोयीज फेडरेशन इंटक के महासचिव ने बताया कि आई डी नंबर 27/1991 से सिविल अपील न 6856/2009 श्रम न्यायालय से सर्वोच्च न्यायालय तक की ये जंग विश्व के कर्मचारी आंदोलन विश्व रेकोर्ड है। उन्होंने देशभर के 8000 अस्थाई कर्मचारी को एकता तथा न्याय व्यवस्था पर भरोसा रख ने पर बधाई दी है संबंध में अगली सुनवाई 21 अगस्त को रखी गई है। जिसमें बाकी बचे कर्मचारियों का भाग्य का फैसला आएगा।

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