गजेन्द्रसिंह के विरोध से मारवाड़ के राजपूतों में बढ़ी नाराजगी

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जसोल की उपेक्षा करने से राजपूत समाज पहले से ही है नाराज
जोधपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेषाध्यक्ष का जिम्मा जोधपुर सांसद और केंन्द्रीय मंत्री गजेंन्द्रसिंह को सौंपने के लिए आलाकमान अडिग है और जल्द इसका एलान हो सकता है लेकिन दिल्ली मे शेखावत के खिलाफ जमकर लाबिंग हो रही है।
उनके बजाय किसी ब्राहाण या दलित नेता को आपसी सहमति से प्रदेषाध्यक्ष बनाने के लिए मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पूरी कोशिश कर रही है। वे पिछले तीन दिन से दिल्ली में डेरा जमाए है और आज उन्होने अपने भाजपा के वरिष्ठ नेता ओम माथुर से उनके घर पर जाकर मुलाकात की। उन्हें ंमुख्यमंत्री गजेंन्द्रसिंह को प्रदेषाध्यक्ष बनाने से पार्टी को जातिगत समीकरण के आधार पर होने वाले गणित से अवगत कराया। उन्हें इस प्रकरण में इस समीकरण से आलाकमान को अवगत कराने का आग्रह किया है।करीब दो घंटे चली इस मुलाकात में गजेंन्द्रसिंह के बजाय किसी भी दूसरे नेता को पार्टी की बागडोर देने पर चर्चा हुई।
उन्होने इस बारे में आलाकमान को भी इस गणित से अवतगत कराया है लेकिन अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा मुख्यमंत्री के प्रयास रंग लाते है या फिर आलाकमान गजेंन्द्रसिंह को ही प्रदेषाध्यक्ष बनाने का एलान करता है। अब चाहे गजेंन्द्रसिंह प्रदेषाध्यक्ष बने या राजें के मन मुताबिक किसी दूसरे नेता को जिम्मा सौंपा जाए लेकिन राजपूतों सहित कई जातियों में भाजपा के प्रति नाराजगी बढ सकती है। खासकर मारवाड़ मे भाजपा के परंपरागत वोट बैंक राजपूतों मे नाराजगी बढना तय है,पिछले विधानसभा चुनाव मे भाजपा को मजबूती देने वालो मे से एक पूर्व विदेषमंत्री जसवंत सिंह जसोल का पत्ता साफ कर उन्हें भी बागी बनने पर मजबूर करने से अभी तक नाराज है। राजपूतों की नाराजगी की वजह से बाडमेर सं कांग्रेस से बगावत करने वाले कर्नल सोनाराम को टिकट देना पडा था। जाट बाहुल्य बाडमेर में राजपूतों के अलावा टिकट नहीं मिलने से जसोल चुनाव हार गए थे। वहीं जसंवतसिंह बाद में बीमार होकर कोमा मे चले गए।
वर्तमान में हालात ये है कि राजे शेखावत के भाजपा प्रदेषाध्यक्ष बनने की राह मे दीवार बनकर खड़ी है,वे राष्ट्रीय नेतृत्व को सीधा चैलेंज दे रही है,दूसरी ओर राष्ट्रीय नेतृत्व शेखावत को ही पद देने पर अडे है,राज्य की भाजपा कौर कमेटी मे सभी वसुंधरा के ही नेता है वे शेखावत का विरोध कर रहे है। दूसरी ओर मारवाड़ के राजपूत शेखावत के पक्ष मे उतरकर उन्हें काबिल व जनता के दिलो पर राज करने वाला नेता बताना शुरू कर दिया,लेकिन लोहावट विधायक व काबिना मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने राजे के सुर मे सुर मिलाते हुए यहां तक कह दिया कि दो महीने से प्रदेषाध्यक्ष के नाम का एलान नहीं किया है और अब भी नहीं किया गया तो कोई पहाड़ नहीं टूट जाएगा। वे महारानी की गुड बुक्स में शामिल है इसलिए उनका यह बयान स्वाभाविक है।
उनके खिलाफ लोहावट से चुनाव लडऩे का मानस बनाने वाले कांग्रेस पीसीसी सचिव करणसिंह उचियारड़ा ने केई बार कहा है कि मुख्यमंत्री राजपूत विरोधी कारनामे करने मे लगी है,वही शेरगढ से पांच बार विधायक रहने वाले,बाबू सिंह राठौर को हर बार मंत्री पद से दूर रखने को लेकर महारानी ने इस मामले मे भी राजपूत समाज को नाराज कर रखा है,मारवाड़ मे सत्ता लाने व सत्ता से दूर रखने मे राजपूतों ने अहम भूमिका निभाई है,गजेंद्र सिह शेखावत को अधयक्ष नही बनाने पर मारवाड़ के राजपूतों की राजनीति मे भूचाल आने व राजे को जवाब देने की तैयारी शुरु होती दिखाई देने लगी है,अगर शेखावत अध्यक्ष बन जाते है तो मुख्यमंत्री के तेवर की वजह से पूरे राज्य मे भाजपा में दो फाड़ भी होना तय है।

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