वास्तु के अनुसार बेहद खास होता है घर का मुख्य द्वार

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घर का मुख्य द्वार बेहद खास होता है क्योंकि यहीं से आपके घर में सकारात्मक और नकारात्मक ऊजाएं प्रवेश करती हैं। यदि आपके घर में कोई हमेशा बीमार रहता है या कोई परेशानी चल रही है, तो इसका कारण घर के मुख्य द्वार में वास्तु दोष हो सकता है। इससे बचने के लिए घर के मुख्य द्वार पर स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। किसी भी धार्मिक कार्यक्रम में या सामान्यत: किसी भी पूजा-अर्चना में घर के मुख्यद्वार पर या बाहर की दीवार स्वस्तिक का निशान बनाकर स्वस्ति वाचन करते हैं। स्वस्तिक श्रीगणेश का ही प्रतीक स्वरूप है। किसी भी पूजन कार्य का शुभारंभ बिना स्वस्तिक के नहीं किया जा सकता। चूंकि शास्त्रों के अनुसार श्री गणेश प्रथम पूजनीय हैं, अत: स्वस्तिक का पूजन करने का अर्थ यही है कि हम श्रीगणेश का पूजन कर उनसे विनती करते हैं कि हमारा पूजन कार्य सफल हो।
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर श्रीगणेश का चित्र या स्वस्तिक बनाने से घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहती है। ऐसे घर में हमेशा गणेशजी कृपा रहती है और धन-धान्य की कमी नहीं होती। साथ ही स्वस्तिक धनात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक है, इसे बनाने से हमारे आसपास से नकारात्मक ऊर्जा दूर हो जाती है।
– यदि घर के सामने पेड़ या खंभा है, तो यह एक अशुभ संकेत है। इसके दुष्प्रभावों को रोकने के लिए घर के मुख्य द्वार पर रोज स्वास्तिक बनाएं।
– घर के मुख्य द्वार के आगे गड्ढा हो, तो परिवार के सदस्य मानसिक पीड़ा से गुजरते हैं। इसके दुष्प्रभाव से बचने के लिए उस गड्ढे को भर दें।
– घर का मुख्य द्वार को साफ और सुंदर है रखते हैं, तो घर में सुख और समृद्धि आती है।
– द्वार पर पानी से भरा कांच का बर्तन रखें, जिसमें ताजे खुशबू वाले फूल रखें। इससे घर में सकारात्मकता आएगी।
– पीपल, आम या अशोक के पत्तों की माला बनाकर प्रवेश द्वार पर बांधें। इससे नकारात्मकता दूर होती है। जब यह पत्तियां सुख जाएँ तो इन्हें बदल दें।
– धन लाभ के लिए प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी जी की तस्वीर लगाएं, लेकिन इनके आस-पास जूते-चप्पल नहीं रखें।
– प्रवेश द्वार पर लक्ष्मी जी के पैर बनाएं, जो अंदर की तरफ जा रहें हों। इससे घर में समृद्धि आती हैं।
– प्रवेश द्वार शुभ लाभ का निशान बनाएं, इससे घर में रोग कम होते हैं।

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