मेहरानगढ़ हादसा : एक दशक बाद भी सामने नहीं आ पाई सच्चाई

0
10

216 युवकों के परिवारों को अपनों को खोने का दर्द आज भी ताजा
ना रिपोर्ट हुई सार्वजनिक ना अभी तक हादसे के जिम्मेवारों पर हुई कार्रवाई
जोधपुर। मेहरानगढ़ दुर्ग में स्थित चामुंडा मंदिर में नवरात्रि के पहले दिन हुए हादसे को आज एक दशक हो गया लेकिन इस हादसे में जान गवानें वाले बेगुनाह 216 लोगों के परिवारों को अपनों को खोने का दर्द और दिल दहलाने वाली यादें ताजा है। उन्हे मलाल इस बात का है कि ना तो इस हादसे की जांच करने वाले जस्टिस जसराज चौपडा की अध्यक्षता में बने जांच आयोग की रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक हो पाई और ना ही हस हादसे के लिए जिम्मेवारों को सजा मिल पाई।
मेहरानगढ़ के चामुण्डा मंदिर परिसर में 2008 में हुए हादसे ने जो जख्म दिए हैं ,जो दस साल बाद भी नहीं भर पाए है। राजस्थान के इतिहास में हुए दिल दहलाने वाले सबसे बड़े हादसे के बाद मेहरानगढ़ प्रशासन और जिला प्रशासन ने मां चामुण्डा के दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर कई तरह के बदलाव किए हैं लेकिन पीडि़त परिवार के लोगों का कहना है कि अब 216 लोगों की जान लील लेने के बाद अब इन व्यवस्थाओं का कोई औचित्य नहीं है।
मेहरानगढ़ दुखान्तिका परिवार मंच मंच के सचिव मानाराम कड़ेला ने बताया कि एक दशक पूर्व नवरात्रि स्थापना के दिन 30 सितम्बर 2008 को जब यह दुखान्तिका हुई तब इसकी निष्पक्ष जांच के लिए 2 अक्टूबर 2008 को राज्य सरकार ने न्यायिक जांच आयोग का गठन किया था। आयोग अध्यक्ष जस्टिस जसराज चौपड़ा ने दुखान्तिका के ढाई साल बाद 11 मई 2011 को अपनी जांच रिपोर्ट तत्कालीन राज्य सरकार को सौंप दी थी। तब से यह रिपोर्ट परीक्षण के नाम पर गृह विभाग और विधि विभाग के ठंडे बस्ते में डाल दी गई। अब यह मामला राजस्थान हाईकोर्ट में चल रहा है लेकिन सरकार अब भी रिपोर्ट सार्वजनिक करने में टालमटोल कर रही है। कड़ेला ने बताया कि जिस दिन चौपड़ा आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी, उसी दिन से सभी पीडि़त परिजन की इंसाफ की पुकार के लिए रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहे हैं। इसके लिए धरना-प्रदर्शन और जोधपुर से जयपुर तक पैदल मार्च और विधानसभा तक का घेराव किया। मंत्रियों-मुख्यमंत्रियों की चौखट पर दस्तक दी, लेकिन सिवाय आश्वासनों के कुछ नहीं मिला। थक हार कर आखिरकार न्यायालय की शरण ली। न्यायालय की ओर से उम्मीद है कि देर से ही सहीं उन्हें न्याय जरूर मिलेगा। इस हादसे के लिए जिम्मेवारों को सजा मिलेगी तभी हमें चैन आएगा।
फैक्ट फाइल: मेहरानगढ़ हादसा
३० सितम्बर 2008 को नवरात्रि पर हादसा
2 अक्टूबर 2008 को न्यायिक जांच आयोग गठित
27 अक्टूबर 2008 को जस्टिस जसराज चौपड़ा आयोग अध्यक्ष नियुक्त
ढाई साल तक जांच चलती रही जिस पर करीब पांच करोड़ खर्च हुए
11 मई 2011 को जस्टिस चौपड़ा ने जांच की फाइनल 860 पृष्ठ की रिपोर्ट तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सौंपी।
सरकारें बदल गईं, लेकिन अब तक ना तो रिपोर्ट सार्वजनिक हुई ना ही जिम्मेवारों के नाम उजागर हो पाए।

LEAVE A REPLY