जेएनवीयू के नये कुलपति की नियुक्ति पर उठे सवाल

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जेएनवीयू शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति ने एक बार फिर उठाई आवाज
जोधपुर। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के नवनियुक्त कुलपति प्रो. गुलाबसिंह चौहान की नियुक्ति पर सवालिया निशान लगने शुरू हो गए है। जेएनवीयू शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति ने इस नियुक्ति को अवैधानिक बताया है।
पिछले कई सालों से कभी शिक्षक भर्ती महाघोटाला तो कभी कुलपति की नियुक्ति तथा उनके कारनामों के मुद्दे पर चर्चा में रहा है। ताजा मामला कुलपति पद पर प्रो. गुलाबसिंह चौहान की नियुक्ति को लेकर है। जेएनवीयू शिक्षक भर्ती संघर्ष समिति के अध्यक्ष ओमप्रकाश भाटी ने बताया कि कुलपति सर्च कमेटी का गठन ही गलत है क्योंकि जयनारायण व्यास विवि, जोधपुर 1962 के एक्ट की धारा 11 (कुलपति) में वर्ष 2017 में विधानसभा द्वारा संशोधन किया गया था। संशोधन के बाद जेएनवीयू एक्ट 1962 की धारा 11 (4) के अनुसार जो व्यक्ति विवि व इसके कॉलेजों से सम्बंधित नहीं है, वहीं व्यक्ति कुलपति सर्च कमेटी का सदस्य बनने का पात्र होगा। इस आधार पर मत्स्य विवि के कुलपति डॉ. भारतसिंह सर्च कमेटी के सदस्य हो ही नहीं सकते क्योंकि पूर्व कुलपति डॉ. रामपाल सिंह के कार्यकाल में इनको जेएनवीयू सिंडिकेट का सदस्य बनाया गया था और यह वर्तमान में भी सिंडिकेट के सदस्य है। इस प्रकार से ये विवि से संबंधित व्यक्ति है और सर्च कमेटी के सदस्य के रूप में पात्र व्यक्ति नहीं है।
चयन की धारा अवैधानिक
जेएनवीयू एक्ट 1962 की धारा 11 में यूजीसी रेगुलेशन-2010 की धारा- 7.3.0(1) के अनुसार संशोधन ही नहीं किया गया, जो कि अनिवार्य था। इसमें उच्च स्तर की क्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थान के प्रति प्रतिबद्धता जैसे उच्च स्तर के गुणों को संशोधन के समय उक्त धारा के साथ जाना चाहिए था। उक्त योग्यताओं को नहीं जोडऩे के कारण ही गत तीन अक्टूबर को राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस सम्बंध में दिशा-निर्देश जारी किए लेकिन सरकार ने कोर्ट के निर्देशों की परवाह किये बिना ही दो कुलपतियों की नियुक्ति कर दी।
नियमानुसार योग्य नहीं
प्रो. गुलाबसिंह चौहान यूजीसी अध्यादेशों के अनुसार किसी भी विवि के कुलपति पद के चयन हेतु योग्यता नहीं रखते है। यूजीसी रेगुलेशन-2010 की धारा- 7.3.0(1) के अनुसार उच्च स्तर की क्षमता, सत्यनिष्ठा, नैतिकता और संस्थान के प्रति प्रतिबद्धता जैसे उच्च स्तर के गुण प्रो. गुलाबसिंह चौहान के पास नहीं है। प्रो. चौहान का प्रोफेसर पद पर प्रमोशन भी विवादों में रहा है जिसकी भी निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। संघर्ष समिति के सचिव डॉॅ. देवेन्द्र कुमार सोलंकी ने बताया कि लगभग 62 शिक्षाविदों ने जेएनवीयू के कुलपति पद हेतु आवेदन किया था। क्या उनमें से कोई भी प्रो. गुलाबसिंह चौहान से उच्च योग्यता वाला व्यक्ति सर्च कमेटी को नहीं दिखा?

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