दिल दहलाने वाले प्रसव पर मानवाधिकार आयोग ने लिया संज्ञान

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नवजात के पैर खींचने से धड़ हो गया था अलग, जैसलमेर एसपी और सीएमएचओ से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्ट
उम्मेद अस्पताल में ऑपरेशन कर निकाला नवजात का सिर
पति ने चिकित्साकर्मियों के खिलाफ दर्ज कराया मुकदमा
जोधपुर। जैसलमेर के रामगढ़ के सरकारी अस्पताल में चिकित्साकर्मियों की लापरवाही की वजह से एक महिला की प्रसव के दौरान नवजात बच्चे के दो हिस्से होने के मामले को मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष प्रकाश टाटिया ने संज्ञान लिया है। उन्होंने जैसलमेर सीएमएचओ और एसपी से तथ्यात्मक रिपोर्ट 11 फरवरी तक पेश करने के आदेश दिए है। इधर चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए है। सात दिनों में इस मामले की रिपोर्ट मांगी है। दिल दहलाने वाली इस घटना में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि महिला का रामगढ अस्पताल में प्रसव दो मेल कंपाउडर ने बर्बरता पूर्वक करवाया था। एक कपांउडर ने बच्चे के पैर खीचे थे और दूसरे ने उसके पेट पर मुक्के मारे थे ताकि बच्चा बाहर आ सके। गौरतलब है कि इस दिल दहलाने वाली घटना के दौरान चिकित्साकर्मियों ने प्रसव के दौरान बच्चे के पैर इतनी जोर से खींचे कि उसके दो हिस्से हो गए। बच्चे का धड़ तक का हिस्सा तो बाहर आ गया, लेकिन सिर अंदर ही रह गया। चिकित्साकर्मियों ने परिजनों को कुछ नहीं बताया और महिला को जैसलमेर के लिए रेफर कर दिया। जैसलमेर से जोधपुर भेज दिया गया, यहां उम्मेद अस्पताल में महिला का आपरेशन करने पर सिर निकला,तभी इस लापरवाही के मामले का खुलासा हो सका। इस पर महिला के पति ने चिकित्साकर्मियों के खिलाफ रामगढ थाने में मुकदमा दर्ज करवाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार रामगढ निवासी दीक्षा कंवर को प्रसव पीडा होने पर तीन दिन पहले उसके घरवाले उसे रामगढ़ अस्पताल ले गए। यहां भर्ती करने के बाद चिकित्साकर्मी ने कहा कि प्रसव पीडा के दौरान चिकित्साकर्मियों ने नवजात बच्चे के पैरे जोरदार खींचे तो धड बाहर आ गया लेकिन बच्चे का सिर अंदर ही रह गया। इस बारे में मरीज और उसके घरवालों को इस बारे में नहीं बताया और उसे जैसलमेर अस्पताल यह कहता हुआ रेफर कर दिया कि महिला को मूत बच्चा पैदा हुआ लेकिन गर्भनाल अदंर रह गई है। जैसलमेर के जवाहर अस्पताल में चिकित्सक डॉ. रविंद्र सांखला को रामगढ़ के अस्पताल से बताया गया कि महिला को डिलीवरी हो गई है, लेकिन आंवल (गर्भनाल या प्लेसेंटा) अंदर रह गई है। रात एक बजे डॉ. सांखला ने गर्भनाल निकालने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें कुछ समझ में नहीं आया तो उन्होंने महिला की तबीयत को स्थिर किया और अगले दिन सुबह फिर से प्रयास किया, लेकिन फिर कुछ समझ नहीं आया। बाद में महिला को जोधपुर रेफर कर दिया गया। जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में चिकित्सकों ने महिला का सिजेरियन आपेरशन किया गर्भ से बच्चे का सिर ही निकला। दीक्षा ने बताया कि जब उसे प्रसव के लिए अस्पताल लाया गया तो वहां ना कोई डाक्टर था और ना ही फिमेल नर्स मौजूद थी। वहां मौजदू दो मेल कंपाउडर ने उसके पीडा होते देख प्रसव कराने लगे और एक कपांउडर उसके पेट पर जोरदार मुक्के मारते हुए जोर लगाने को कहना लगा और एक कपांउडर बच्चे के पैर खींचने लगा। इस बर्बरता को देख वह उनसे गुहार कर रही थी उसे जैसलमेर रेफर कर दो लेकिन बाद उसे जैसलमेर जाने का कह दिया गया। जैसलमेर के डाक्टर को बताया कि उसके मूत बच्चा पैदा हुआ और गर्भनाल भीतर रह गई है। दिल दहलाने वाली पीडा को याद कर दीक्षा अभी भी सहमी है। वह उस पीडा कपांउडरों की वजह से बच्चे की हुई मौत की वजह से सदमें में है। वास्तव में रामगढ अस्पताल में चिकित्साकर्मियों की लापरवाही की वजह से बच्चे के पैरे जोर से खीचने पर उसके दो हिस्से हो गए और सिर धड से अलग हो गया। इस पर दीक्षा के पुित ने बच्चे का सिर रामगढ पुलिस को सौपते हुए रामगढ सामुदायिक अस्पताल के चिकित्साकर्मियों के खिलाफ लापरवाही बरतने का मुकदमा दर्ज करवा दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच आरंभ कर दी है। जब चिकित्साकर्मियों से पूछताछ की तो पुलिस को धड का हिस्सा सौप दिया गया।
आज पुलिस ने बच्चे के सिर व धड का पोस्टमार्टम करवाया है। इधर रामगढ़ अस्पताल के चिकित्सा प्रभारी डॉ. निखिल शर्मा ने बताया कि प्रसूता को वहां मौजूद चिकित्साकर्मी प्रसव के लिए प्रसव कक्ष में ले गए। वहां, देखा कि नवजात के पैर बाहर नजर आ रहे थे और वो मृत अवस्था में था। यहां पूरी सुविधा नहीं होने के कारण प्रसूता को जैसलमेर रेफर किया गया। जबकि जवाहर अस्पताल के चिकित्सक को डिलीवरी होने की बात कही गई थी। जवाहर अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ और पीएमओ डॉ. उषा दुग्गड़ ने बताया कि बच्चे के दो हिस्से कैसे हुए, यह जांच का विषय है। रामगढ़ पुलिस जब यहां आई तब इस घटना की जानकारी मिली। रामगढ अस्पताल प्रशासन ने अपनी गलती छिपाने के लिए महिला को जैसलमेर रेफर कर दिया था।

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