शहर कांग्रेस में बढ़ती अंदरूनी खींचतान

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पदाधिकारियों में अपने आप को बेहतरीन साबित करने की मची होड़
जोधपुर। कांग्रेस के सत्ता में आते ही जोधपुर शहर कांग्रेस में आपसी अंदरूनी खींचतान बढने लगी है। इधर शहर जिलाध्यक्ष बीमार है और जयपुर में इलाज करवा रहे है। दूसरी ओर पदाधिकारियों में अपने को बेहतरीन साबित करने की होड मची है और अपने तरीके से संगठन को चलाने की कोशिश करने लगे है। आपसी खींचतान कल जोधपुर प्रभारी लालचंद कटारियों के सामने खुलकर आ गई। हालांकि इस खींचतान के पीछे राजनीति नियुक्तियों पाने की लालसा को बडी वजह माना जा रहा है। कुछ नेता तो अपनी नियुक्ति तय मान दूसरे नेताओं के खिलाफ माहौल तक बनाने में लगे है। इससे आने वाले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए मुष्किलें खडी हो सकती है।
पूर्व में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के खास माने जाने वाले जोधपुर में मानसिंह देवडा,जुगल काबरा,राजेंद्र सोंलकी,सईद असंारी रमेश बोराणा और रामेष्वर दाधिच कांग्रेस का चेहरा माने जाते थ। गहलोत दो बार मुख्यमंत्री रहे लेकिन इन नेताओं का ना आम लोगों से और ना ही कार्यकत्ताओं के प्रति रवैया बदला। देवडा व काबरा के निधन हो चुका है और सईद असंारी बीमार है। वहीं गहलोत के विधानसभा चुनाव का जिम्मा संभालने वाले राजेंद्र सोंलकी एकदम शांत है। फ्रंट पर नजर आने के बजाय परदे के पीछे ही कांग्रेस को मजबूत करने और शहर के विकास कार्य नए सिरे से शुरू करवाने के काम में लगे है। वही बोराणा व दाधिच भी अभी फ्रट पर खास नजर नहीं आ रहे है। हालांकि कई ऐसे नेता इन दिनों अत्याधिक सक्रिय नजर आने लगे है जो मुख्यमंत्री के खास दर्शाते हुए किसी को कुछ नहीं समझ रहे है। इसको लेकर भी कांग्रेस के भीतर खंीचतान बढने लगी है। इन नेताओं की जेडीए चेयरमेन,राजसीको सहित कई राजनीतिक नियुक्तियां पाने की कोशिश चल रही है। इस बार जेडीए चेयरमेन पद के लिए माली समाज के अलावा राजपूत,ब्राहाम्ण व ,ओसवाल की ओर से दावेदारी कर रहे है जबकि सुनील परिहार राजसीको चेयरमेन पर अपनी नियुक्ति तय मान रहे है हालांकि निर्विवाद रहे रमेश बोराणा को इस बार भी संगीत नाटक अकादमी का जिम्मा सौंपा जा सकता है। जमीन से जुडे गहलोत आम लोगों से लेकर कार्यकत्ताओं से आत्मीयता से मिलते है लेकिन कुछ नेताओं का सियासत का नशा इस कदर चढकर बोलने लगा है कि कार्यकत्ताओं से व्यवहार भी इन दिनों चर्चा में है।
जिलाध्यक्ष पद पर भी नजर
आपसी खींचतान के बीच कुछ नेताओं की शहर जिलाध्यक्ष पद पर भी नजर है। जोधपुर शहर अध्यक्ष पद की सईद अंसारी मई 2005 में नियुक्ति हुई थी। 2013 में कांग्रेस की करारी हार होने पर उन्होने वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को इस्तीफा भेज दिया था लेकिन जोधपुर शहर जिलाध्यक्ष पद पर किसी की नियुक्ति नहीं की गई। पिछले साल अगस्त में दुबारा असांरी को अध्यक्ष बना दिया गया। हालांकि बीमार होने की वजह से वे विधानसभा चुनाव प्रचार में सक्रिय नहीं हो पाए और अभी भी वे जयपुर में इलाज करवा रहे है। उनके अनुपस्थिति से शहर कांग्रेस का हर पदाधिकारी अपने को अध्यक्ष मान संगठन को चलाने की कोशिश कर रहा है लेकिन सुरेश व्यास,आन्नदसिंह चौहान और लियाकत अली असांरीं पर अपने तरीके से शहर कांग्रेस को चलाने के आरोप लग रहे है। यहीं वजह है कि अनिल टाटिया के ब्लाक कमेटी के कार्यकारिणी नहीं बनाने पर आवाज उठाने पर विवाद खडा हो गया। जिस तरह कांग्रेस के भीतर एक दूसरे को मात देने और फ्रट पर आने का खेल चल रहा है। उससे शहर कांग्रेस में आने वाले दिनों में खींचतान ओर बढने के आसार है।
लोकसभा चुनाव के लिए दावेदारी
लोकसभा चुनाव के शहर व देहात कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार का फैसला गहलोत पर छोड दिया है। हालांकि देहात कांग्रेस के काशीराम ने वैभव गहलोत को नाम का प्रस्ताव रखा लेकिन सर्वसम्मति से फैसला गहलोत पर छोड दिया गया। वैसे भी वैभव गहलोत को टोंक या जालोर से चुनाव मैदान में उतारा जा सकता है। जोधपुर से चन्द्रेश कुमारी व हनुमानसिंह खागटा को मैदान में उतारा जा सकता है लेकिन जातिगत समीकरण के आधार पर गहलोत किसी दूसरे सशक्त उम्मीदवार को भी यहां से मैदान में उतार सकते है।

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