लापरवाही की हद

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जोधपुर में एक बार फिर से कोरोना संक्रमितों का आंकड़ा रोजाना पांच सौ के नजदीक पहुंचा गया, दुबारा संक्रमितों की बढ़ती संख्या और मौतों के आंकड़ों ने आम लोगों ही नहीं प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मुख्यमंत्री पहले ही प्रदेश में फिर से संक्रमण का खतरा बढऩे की आशंका जता चुके है लेकिन लोग संक्रमण को लेकर बेपरवाह होते जा रहे है। जोधपूर में मार्च महीने से अभी तक 40 हजार 551 लोग संक्रमण के दायरे में आ चुके और अब तक तीन हजार संक्रमित जान गंवा चुके है। पिछले महीनें संक्रमितों की संख्या कम होने के साथ ही मौतों का आंकड़ा भी कम था लेकिन इस महीने के आठ दिनों में ही 3154 संक्रमित मिल चुके और 36 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रदेश के सबसे संक्रमित शहर जोधपुर में कोरोना का वायरस फिर ताकतवर हो गया है। अक्टूबर के आखिरी दिनों नए संक्रमितों का आंकड़ा अधिकतर 200 से 300 के बीच रह रहा था लेकिन पिछले तीन दिनों में लगातार नए रोगियों का आंकड़ा 450 से अधिक आने से खतरा फिर बढऩे की आशंका गहराने लगी है। जोधपुर में संक्रमण के तेजी से बढऩे की कुछ वजहें साफ है। बीते दिनों हुए नगर निगम चुनाव में जमकर सोशल डिस्टेटिंग की धज्जिया उड़ाई गई। लगता है उस दौरान कोरोना संक्रमितों की संपर्क में आने से अब नए संक्रमितों की संख्या फिर से बढऩे लगी है। इसके साथ बाजारों में कारोबारी गतिविधियां खुलने और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़भाड़ बढऩे लगी है। जो प्रवासी मजदूर अपने गांव-घर चले गए थे, वे भी कारखाने वगैरह खुलने से वापस लौटने लगे हैं। लॉकडाउन खुलने के शुरुआती दिनों में तो बाहर से आने वालों की जांच की जाती रही, ताकि उनकी वजह से संक्रमण दुबारा न फैलने पाए। मगर फिर शिथिलता बरती जाने लगी। फिर सर्दी शुरू होने के साथ मौसम में नमी लौटी और वायुमंडल पृथ्वी की सतह के करीब सघन होने लगा। हवा में प्रदूषण बढ़ गया। इस प्रदूषण में कोरोना के विषाणु भी पांव पसारने लगे।
गौरतलब है कि इससे पार पाने के लिए सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे तभी घरों से बाहर निकलें, जब बहुत जरूरी हो। उचित दूरी बनाए रखें, हाथ धोते रहें, मुंह ढंका रखें। जब तक वैक्सीन नहीं आ जाती, तब तक किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। प्रधानमंत्री ने भी बार-बार लोगों से सावधानी बरतने की अपील की। मगर हकीकत यह है कि लोगों ने सब कुछ खुलने का मतलब यह मान लिया कि कोरोना का खतरा टल गया है। जगह-जगह भीड़भाड़ लगाना शुरू कर दिया, बिना मुंह ढंके घूमने-फिरने लगे।
दशहरे के साथ ही त्योहारों का मौसम शुरू हो जाता है और दिवाली की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो जाती हैं। इस मौसम में बाजारों में अपेक्षया भीड़भाड़ कुछ अधिक रहती है। चूंकि वस्त्र, बिजली के सामान, खिलौने आदि जैसी कई व्यावसायिक गतिविधियां दिल्ली के थोक बाजारों पर निर्भर हैं, आसपास के राज्यों से कारोबारियों का आवागमन बढ़ जाता है। घरों की रंगाई-पुताई करने वाले मजदूरों-कारीगरों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में अगर बिना नाक-मुंह ढंके और उचित दूरी का ध्यान रखे लोग आपस में मिलेंगे-जुलेंगे तो संक्रमण का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा। जैसा की अभी जोधपुर में होने लगा है। जिस समय पूरे देश में कोरोना संक्रमण तेज गति से बढ़ रहा था, राजस्थान सरकार ने जरूरी सावधानी बरतते हुए जांचों में तेजी लाने, इलाज का इंतजाम करने में अच्छा काम किया। उसका नतीजा भी दिखा कि बहुत तेजी से संक्रमण पर काबू पाया जा सका। मगर फिर प्रशासन और चिकित्सा विभाग खुद ही शिथिल हो गए और लोगों से अपील की गई कि वे नाहक भयभीत न हों, घर पर रह कर भी कोरोना संक्रमण का इलाज संभव है। अब दीवाली से पहले जिस तरह जोधपुर मेंं नए संक्रमितों की संख्या और मौतों का आंकड़ा बढ़ रहा है और डाक्टर्स अगले दो महीनों संक्रमण बढऩे की आशंका जता रहे है, ऐसे में हमें खुद अधिक सर्तक रहने की जरूरत है। हमें खुद सर्तकता बरतते हुए अपना ध्यान रखना होगा और सरकार से कुछ अधिक सख्त और व्यावहारिक कदम उठाने की अपेक्षा है ताकि प्रदेश में दुबारा कोरोना संक्रमण सिर चढक़र नहीं बोल पाए।

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